Friday, August 8, 2008

आज भगत सिंह होते तो?

कल एक लैब में टेस्ट के लिए अपनी बारी का इन्तिज़ार करते हुए अखबार में छोटी सी ख़बर पढ़ी कि संसद में भगत सिंह की मूर्ति लगाई जाएगी. तब से मन बुरी तरह बेचैन है. ये वही संसद है, जहाँ भगत सिंह और साथियों ने साम्राज्यवादियों के कान खोलने के लिए बम फेंका था. ये वही संसद है जहाँ साम्राज्यवादियों के पिट्ठू और सांप्रदायिक ताकतों की पार्टी के हीरो सावरकर की मूर्ति लगाई जा चुकी है और इन दिनों लोकतंत्र के मसीहा बताये जा रहे सोमनाथ `जी` सावरकर को लेकर भावुक हो रहे थे. ये वही संसद है, जहाँ साम्राज्यवाद और पूंजीवाद के सरदार अमेरिका को देश बेचने के लिए हमारे नेता उतावले रहते हैं (परमाणु मसले पर बहस का नज़ारा भी याद आता है). ओह, भगत सिंह आप होते तो ऐसी संसद के साथ आज क्या सलूक करते?

2 comments:

परेश टोकेकर said...

धीरेश जी अब तबीयत कैसी है आपकी? 7 अगस्त को का. येचूरी का इन्दौर में एक कार्यक्रम था, उसकी व्यस्तता के चलते आपको मेंल नहीं कर पाया।
आज भगतसिंह होते तो? खैर भगतसिंह आज जिंदा होते तो फिर वे वो भगतसिंह नहीं होते जिन्हें आज जाना जाता है। सुकरात जहर का प्याला न पीते व जान बचाकर भाग जाते तो उन्हें कोई न पुछता। इधर हमारी यहा जिंदा को मारने की व मरो को स्वर्गिय बनाने की रवायत है। हमारे यहा मरा आदमी सब विचारो से परे हो जाता है अब भगतसिंह नास्तिक थे तो क्या मरकर वे महान हो बये अब उनकी मृत्यु के बाद हम तो उनकी मुर्तिया लगाकर भगवान बनाकर पूजा करेंगे उनके विचार जाये भाड में वैसे भी हमारा विचार विचारधारा से क्या लेना देना। मुर्तियों में बसाया गया भगवान हमारे यहा विचारों की हत्या का सबसे सस्ता हथियार माना जाता है।
अगर आज भगतसिंह होते तो चीन या पाक परस्त देशद्रोही का ताना खाते गुमनामी के अंधेरे में कही होते? या किसी गोडसे तोगडिया की गोली का निशाना बना दिये गये होते, पाश सफदर के साथ भी तो यही सब कुछ हुवा।

neetu said...

bhagat singh kee jagah aisee sansad mein nahee.n hai. jab unhone bam fenka tha to vahan kai achhe log bhee baithe the. aaj to adhiktar deshdrohee hain