फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा में सत्ता छोड़ने का एलान किया है। वे पिछले काफी वक्त से बीमार हैं। अमरीका और हर समर्ज्यवादी-पूंजीवादी की आँखों की किरकिरी कास्त्रो अमेरिका से लेकर दुनिया के हर कोने में न्याय के पक्षधर लोगों के दिलों पर राज करते हैं और इस बात का कोई अर्थ नही है कि वे अब सत्ता नहीं संभालेंगे। उन्होंने अपने जीवन का बेहद विवेक और बेमिसाल साहस के साथ जनता के लिए इस्तेमाल किया है और वे एक गहरे भरोसे की तरह हैं। अपने भगत सिंह और कास्त्रो के साथी चे की तरह ऐसे ढेरों उदाहरण मिलेंगे, जिन्होंने अपनी शहादत से मिसाल पेश कीं। लेकिन कास्त्रो के जीवन को देखकर अचरज ही होता है कि कैसे उन्होंने क्रांति की कमान संभाली, और फिर तमाम आर्थिक पाबंदियों के बावजूद देश में आम लोगों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य की ऊँचे स्तर की सुविधाएँ मुहैया करायीं और इस समाजवादी ढांचे की सफलता से दुनिया भर के लोगों को रह दिखाई, लगातार एक बेहद सजग बुद्धिजीवी की तरह जटिल मसलों पर लिखते-बोलते रहे। यह अकारण नहीं है की उन्हें हजारों हज़ार ढंग से मारने की कोशिश करता रहा दुश्मन भी अपने मीडिया में उनकी उपलब्धियों को देखने को मजबूर रहा है। यह भी अकारण नही है कि वे इस वक्त समरज्य्वाद, पूंजीवाद और हर तरह के अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने वालों के बीच सबसे ज़्यादा पढे जा रहे हैं और अपने यंहा भी उनके लगातार अनुवाद हो रहे हैं। नेरुदा और मर्ख्वेज जैसे कवि उन पर लिखते हैं। मर्ख्वेज की उन पर लिखी छोटी सी पुस्तक अद्भुत है।