भीमराव अम्बेडकर के विचार-हिंदू धर्म में रहकर जातिप्रथा समाप्त करने का प्रयास मीठे जहर को चाटने के समान होगा।
-हिन्दूवाद आजादी, बराबरी और भाईचारे के लिए एक खतरा है। इसी कारण इसका लोकतंत्र से कोई मेल नहीं, यह उसका विरोधी है।
-हिंदू धर्म जो असमानता और अन्याय की विचारधाराओं पर आधारित है, गरिमा एवं उत्साह के लिए कोई स्थान नहीं छोड़ता।
-मैं घृणा करता हूँ अन्याय से, ज़ुल्म से, आडम्बर से व पाखण्ड से, छल कपट और बकवास से। जो लोग इनके अपराधी हैं, वे सभी मेरी घृणा की लपेट में आते हैं।
-हिंदू समाज एक ऐसी मीनार के समान है जिसमें अनेक मंजिलें हैं, पर उनमें प्रवेश के लिए कोई द्वार नहीं है। व्यक्ति उसी मंजिल में दम तोड़ेगा जिसमें वह पैदा हुआ।
-हिंदू समाज व्यवस्था की जड़ में वह धर्म है जो मनुस्मृति में निर्धारित है......जब तक स्मृति-धर्म की वर्तमान नींव को उखाड़कर कोई नवीन नींव नहीं डाली जाती, तब तक हिंदू समाज से असमानता का अंत सम्भव नहीं होगा...
-भीमराव अम्बेडकर