Sunday, February 7, 2010

अमीर ख़ुसरो की सोहबत




ऐ कि ज़बुत - ए - ताना ब हिंदू बरी
हम ज़वी आमोज़ परस्तिश गरी

Oh you, the one taunting Hindus on their idol worship; first learn from them how to worship

हिंदुओं को बुतपरस्ती का ताना देने वाले! पहले इबादत करने का सलीक़ा उनसे सीख ले।
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दिलत बर गुर्बा ई गर मेहरबानस्त
निशान-ए-सोहबत-ए-ईमां हमानस्त
दिलत रा गुर्बा बुरद, व गर ब नुरदस्त
बरो पेश-ए-संग अन्दाज़श कि मुर्दस्त

If your heart flutters even for a cat
it`s a sign of faith
But if your heart cannot be affected even by a cat,
Then assume it is dead, it`s a stone

अगर तुम्हारा दिल एक बिल्ली पर मेहरबान है तो ये ईमान की निशानी है। लेकिन अगर तुम्हार दिल एक बिल्ली भी नहीं ले सकती तो समझ लो वो मुर्दा हो चुका है, उसे पत्थर के साथ रख दो।
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बन्दा-ए-हम आखिर गोहर-ए-आदम अस्त
गर्चे कि दर सिल्क-ए-गुलामी ज़म अस्त
कार ब अन्दाज़ा-ए-बाजुश देह
बार ब मिक़दार-ए-तराजुश नेह

Although a slave, he is after all a child of man
Give him as much work as his arms are capable of doing;
Put as much load on a scale as it can hold

गुलाम सही, मगर है तो वो भी आदमी ही की औलाद।
उसकी ताक़त के हिसाब से काम दो। तराजु पर उतना ही बोझ रखो
जितना कि वह उठा सके।
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कसे रन्ज दर हासिले चूँ बुरद
कि अज़ रन्ज-ए-उ दीगरे बर खुरद
यके खुरद दर ख्वाब नान व कवाब
यके रा न्यामद खुद अज़ फाक़ा ख्वाब

Does one work hard for others to eat one`s fruit of labour?
While some consume the naans and kebabs even in their dreams,
the hardworking labourer has lost his sleep due to starvation

क्या इसलिए कोई मेहनत करता है कि उसकी मेहनत का फल दूसरे लोग खा जाएं?
एक तरफ तो ख्वाब में भी नान और कबाब उड़ाए जाते हैं और दूसरी तरफ मेहनत
करने वाले मज़दूर की नींद भूख से उड़ गई है।
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4 comments:

रंगनाथ सिंह said...

ऐसा रचनात्मक जवाब साहित्य की ताकत जाहिर करता है। बेहतरीन।

सुशीला पुरी said...

sudar anuwad......

ali said...

सुन्दर चयन !

वर्षा said...

अरे वाह! दिल में इक लहर सी उठ गई शायद...